Monday, April 20, 2026
HomeLove & Breakupनेहा की अधूरी मोहब्बत - प्रेम और सामाजिक संघर्ष की कहानी

नेहा की अधूरी मोहब्बत – प्रेम और सामाजिक संघर्ष की कहानी

नेहा, एक हंसमुख और चंचल स्वभाव की लड़की थी। हमेशा चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए हुए वो 15 साल की लड़की किसी का भी दिल जीत लेती थी।
लेकिन… उसे क्या पता था कि जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आएगा जो उसकी जिंदगी बदल के रख देगा।

छोटी उम्र में हुआ प्रेम! हाँ वही प्रेम जो आजकल के स्कूली बच्चों में आम सी बात हो गई है।
नेहा की जिंदगी में भी ऐसे ही एक लड़के ने दस्तक दी जिसने उसके दिल के तार छेड़ दिए।

उस लड़के ने नेहा की उम्मीदों को जैसे आसमान पर पहुँचा दिया। और यही थी नेहा की सबसे बड़ी गलती।

आइए जानते हैं कैसे इस वाकये ने उसकी जिंदगी बदल कर रख दी।

नेहा का पारिवारिक परिचय

उसके एक मिडिल क्लास फैमिली से थी जिसमें उसकी माँ (स्वाति), पापा (अमन), छोटा भाई शिवम् और छोटी बहन रिंकी थे।

उसके पापा ने अपनी पसंद से शादी की थी। स्वाति के पतले-दुबले शरीर और हमेशा बीमार रहने के कारण नेहा की दादी उसे पसंद नहीं करती थी, जो कि परिवार में हमेशा क्लेश का कारण बनती थी।
इन सबसे परेशान होकर शादी के 1 साल के भीतर ही अमन अपनी पत्नी के साथ अलग रहने लगा।

तीनों भाई-बहनों में उम्र का अधिक अंतर नहीं था। 3 वर्षों तक तो तीनों भाई-बहन ने साथ में एक ही स्कूल में पढ़ाई की। लेकिन नेहा के पढ़ाई में होशियार होने के कारण उसके पापा ने अच्छी शिक्षा के लिए उसे दूसरे स्कूल में भर्ती करा दिया।

अब देखते-देखते नेहा 15 साल की हो चुकी थी। वह उम्र के उस पड़ाव में कदम रख चुकी थी, जिसमें बहुत सी चीजें मन को आकर्षित करती हैं।
अब यहां से शुरू होती है निखिल और नेहा की प्रेम कहानी।

स्कूल वाला पहला प्यार – निखिल की एंट्री

जब नेहा कक्षा नवमीं में थी, उसकी मुलाकात उसी के स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र निखिल से होती है।
निखिल बेहद मजाकिया स्वभाव का होने के कारण नेहा का खूब मनोरंजन करता था।
और जब नेहा किसी भी बात को लेकर परेशान होती थी, तो वो उसे एक अच्छे दोस्त की तरह समझता और समझाता भी था।
नेहा को निखिल के साथ रहना, उससे बातें शेयर करना अच्छा लगता था।

वे दोनों ही एक-दूसरे को नहीं खोना चाहते थे। मगर निखिल की जिंदगी में पहले से ही एक लड़की थी, जिस कारण नेहा चाहकर भी अपने दिल की बात उससे नहीं कर पाती थी।
निखिल भी नेहा की ओर मन ही मन आकर्षित था और अपनी वर्तमान गर्लफ्रेंड के साथ उसके संबंध ठीक भी नहीं चल रहे थे।

ऐसे हुई प्रेम कहानी की शुरुआत

नेहा की सहेली रिता और निखिल का दोस्त सोनू पहले से ही रिलेशनशिप में थे।
इन्हीं की वजह से नेहा और निखिल एक-दूसरे के बेहद करीब आने लगे।

उन्हें लगता था कि वो दोनों अपने दोस्तों की मदद कर रहे थे, पर कहीं न कहीं वो भी एक-दूसरे को लाइक करने लगे थे।
पर उनके रिश्ते को शुरू होने में थोड़ा वक्त और था।

नेहा की पढ़ाई अभी चल ही रही थी। लेकिन निखिल अब 12वीं की पढ़ाई पूरी कर चुका था।
स्कूल से निकलने के बाद भी वो नेहा से बीच-बीच में मिलता और दोनों की खूब बातें होती थीं।

यूँ कहना गलत नहीं होगा कि दोनों अनकही मोहब्बत का मज़ा ले रहे थे!

निखिल ने स्कूल छोड़ने के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ दी। अब वो रोज़ नेहा से मिलने जाता था।
नेहा को भी उसका आना और बातें करना बहुत अच्छा लगता था।

मानो दोनों को एक-दूसरे की लत लग गई हो, जैसे कि उनका रिश्ता हीर और रांझा से भी गहरा हो, सालों पुराना हो।
उनका ऐसा लगाव देखकर उसके सभी दोस्त हैरान थे।

एक दिन आखिरकार निखिल ने मन बना ही लिया…

कि क्यों न इस अनकही मोहब्बत को आगे बढ़ाकर उसे पूरी तरह से अपना बना लिया जाए।

निखिल ने नेहा को फोन किया।

नेहा – हेलो! हाँ निखिल, बताओ।
निखिल – नेहा मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
(सब कुछ जानते-समझते हुए भी नेहा ने मज़े लेने के लिए कहा)
नेहा – मैं अच्छी लगती हूँ!! ये बात तो तुम मुझे पहले भी बोल चुके हो। इसमें क्या नया है?
निखिल – अरे! तुम समझ नहीं रही हो। मुझे तुम्हारा हँसना, मुस्कुराना, ज़ुल्फें लहराना, बातें करना सब कुछ बहुत अच्छा लगता है।
नेहा – साफ-साफ बोलो न, कहना क्या चाहते हो!!
निखिल – नेहा! आई लव यू!!
नेहा (मज़े लेते हुए) – अच्छा जी, तो आज मज़ाक के मूड में हैं श्रीमान जी!
निखिल – अरे सच्ची में जी, आई लव यू सो मच! जवाब दो न मेरी बात का।
नेहा (थोड़ी शर्माती हुई बोली) – हाँ बाबा, मैं तो कब से तैयार हूँ तुम्हारे लिए। तुमने ही काफी देर कर दी ये बात कहने में।

आई लव यूयूयूयूयू सो सो सो मच, बुद्धू।

इतना सुनते ही निखिल खुशी से उछल पड़ा।
मानो बरसों बाद हिम्मत जुटा के आज वो पा लिया हो जिसे पाने की चाहत दिल में कई सालों से छुपी हुई थी।

वो इजहार के बाद पहली मुलाकात

एक दिन निखिल ने नेहा के साथ कहीं घूमने का प्लान किया।
यूँ तो नेहा को घर में झूठ बोलकर जाने की आदत नहीं थी।
पर वो क्या करती? प्यार में तो कुछ समझ ही नहीं आता है, मन और दिमाग — दोनों ही काम करना बंद कर देते हैं।

इसके बाद अगले दिन उसकी दोस्त रीता को अपने घर बुलाकर घूमने जाने की बात अपने पापा से कहती है।
रीता को साथ देख उसके घरवाले उसे मना नहीं करते और साथ जाने दे देते हैं।

मन ही मन नेहा झूठ बोलने की शर्मिंदगी और निखिल से मिलने की खुशी महसूस कर रही थी।

रास्ते में निखिल ने नेहा को साथ गाड़ी में बैठाया और दोनों निकल पड़े — अपने प्रेम भरे संबंध में एक और याद जोड़ने के लिए।

वो सच में बहुत ही प्यारी सी जगह थी! नदी किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे निखिल की बाहों में नेहा ने जो सुकून महसूस किया, वो सुकून शायद ही उसे कहीं और मिला हो।

ऐसे मंत्र-मुग्ध कर देने वाली जगह में बैठे दो प्रेमी जोड़ों के होठों को स्पर्श होने से भला कौन रोक सकता था।

नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं!! सिर्फ वो साँसों की आवाज़ और बस एक-दूसरे में खो जाने की चाहत!!
नेहा ने उसे कस के पकड़ रखा था।

यह वक्त मुट्ठी में बंधी रेत की तरह कब हाथ से फिसल गया और शाम हो गई, पता ही नहीं चला।
न चाहते हुए भी एक-दूसरे से अलग होकर फिर घर की ओर लौटना पड़ा।

रिश्तों में आई खटास

एक बहुत ही अच्छे लम्हे से निकलने के बाद अचानक नेहा ने ये महसूस किया कि निखिल का उसकी ओर झुकाव थोड़ा कम सा होने लगा है।
नेहा ने इस बारे में निखिल से बात करने की कोशिश भी की।
तब निखिल ने अपने पापा की दुकान पर बेहद व्यस्त होने की बात कही।

अब कुछ दिनों तक नेहा और निखिल की बातचीत थोड़ी कम होने लगी।
नेहा के भी सेमेस्टर एग्जाम थे। उधर निखिल ने भी दुकान पर व्यस्त होने की बात कहकर बात बंद कर दी थी।

लगभग 1 महीने तक बातचीत से लेकर मिलने-जुलने तक सब बंद हो गया था।

उसे याद करते हुए नेहा कई बार उसकी फोटो से ही बात करने लग जाती थी।
निखिल ने तो नेहा के कॉल और मैसेजेस का भी जवाब देना बंद कर दिया था।

नेहा को लगने लगा था कि कहीं निखिल की लाइफ में किसी और ने तो जगह नहीं ले ली है?
पर कौन जानता है ये बात सच है या सिर्फ मन का वहम!!
ऐसा सोचकर नेहा उसकी याद में बहुत परेशान रहने लगती है।

वो महीनों बाद वाली मुलाकात

एक दिन कॉलेज से लौटते वक्त अचानक एक लड़का स्कार्फ बांधे हुए नेहा के बगल से गुज़रा।
शुरू में तो नेहा ने उसे अनदेखा किया।

लेकिन बार-बार उसके पास आने से नेहा थोड़ी घबरा सी गई और तेज-तेज चलने लगी।
वो स्कार्फ वाला लड़का भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा।

नेहा के दिल की धड़कन डर के मारे तेज-तेज धड़क रही थी कि तभी उस लड़के ने नेहा को सामने से आकर रोक लिया।

अंदर से घबराई हुई नेहा बस चीखने ही वाली थी कि उस लड़के ने अपने चेहरे से स्कार्फ हटा लिया।

अनजाने डर से घबराई हुई नेहा अचानक खुशी से उछल पड़ी।
निखिल को अचानक सामने पाकर वो भावनाओं के विशाल समंदर में गोते खाने लगी।

वो समझ नहीं पा रही थी क्या करूँ।
एक बार खुश होती तो अगले ही पल भावुक होकर रोने लग जाती।

उसने गले से भी लगा रखा था और हाथों से मार भी रही थी।
उसने गुस्से से उसे बहुत ज़ोर की डाँट लगाई, मानो महीने भर का गुस्सा एक पल में ही उस पर उतार दिया हो।

वहीं दूसरे पल में ही उससे पूछा –

“कैसे हो तुम? ठीक तो हो न? मेरी याद भी नहीं आती क्या तुमको? तुम्हें पता भी है मैंने तुम्हें कितना याद किया? क्यों किया तुमने ऐसा बताओ मुझे?”

निखिल ने पहली बार नेहा का ऐसा रूप देखा था।
उसने भी उसे कस के बाहों में भर लिया और शांत करने के लिए उसके माथे पर किस किया।

फिर निखिल ने खूब माफ़ी माँगी।
अपने व्यस्त होने और बात न कर पाने के कई कारण और किस्से बताए।

भला प्यार में पड़ी हुई नेहा कब तक उससे गुस्सा रह पाती।
आखिरकार हारकर उसने निखिल को माफ़ कर ही दिया।

आज दोनों ने ढेर सारी बातें कीं।
एक बहुत ही रोमांटिक पल एक-दूसरे के साथ बिताया।
और साथ ही निखिल ने नेहा को उसके जन्मदिन पर बहुत ही प्यारा सा उपहार देने का वादा किया।

नेहा का जन्मदिन बना सबसे बड़ी मुसीबत

आज नेहा का जन्मदिन था।
उसके घरवाले शाम को काफी देर से आने की बात कहकर किसी काम से बाहर गए हुए थे।
तब नेहा ने निखिल को अपने घर बुलाकर जन्मदिन मनाने का फैसला किया।

निखिल छुपते-छुपाते नेहा के घर पहुँचा।
आज के दिन नेहा भी निखिल से बहुत कुछ उम्मीद लगाकर बैठी थी कि वो उसके जन्मदिन को सबसे यादगार दिन बना देगा।

दोनों मिलते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर काफी देर यूँ ही बातें करते हुए खड़े रहते हैं।

निखिल ने अभी भी नेहा को विश नहीं किया था।
वो नेहा को लेकर डेट पर ले जाने की प्लानिंग करके आया था।
इधर नेहा भी सोच रही थी कि ये आज मुझे क्या उपहार देने वाला है?

इसी तरह दोनों बेहद खुश होकर इस पल को यादगार बनाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी…

तभी किसी के दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई।
पहले तो नेहा ने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा। इसलिए उसने दरवाज़ा नहीं खोला।

तभी बाहर से आवाज़ आई –
नेहा बेटा दरवाज़ा खोलो, हम हैं!”
क्या सच में? पापा आप हो क्या?”
नेहा के पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी थी।

उसने बेहद डरी हुई आवाज़ में पूछा –
हाँ बेटा, हम ही हैं, दरवाज़ा खोलो!”

नेहा ने उम्मीद भी नहीं की थी कि उसके घरवाले उसके जन्मदिन पर उसे ऐसा सरप्राइज़ देंगे।

नेहा ने तुरंत ही निखिल को दरवाज़े के पीछे छिपा दिया।
निखिल भी अंदर से बहुत डरा हुआ था।

बेहद घबराई और डरी हुई नेहा ने जैसे-तैसे दरवाज़ा खोला।
नेहा को देखते ही उसके पापा ने उसे गले लगा लिया और एक सुंदर सी ड्रेस देते हुए जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।
उसके पापा उसके लिए केक, मिठाईयाँ और उपहार लेकर आए थे।

पर नेहा को ये उपहार नहीं — उसके मौत का सामान महसूस हो रहा था।

मामले का खुलासा

नेहा के मम्मी-पापा घर के अंदर आए और मौका पाकर निखिल घर से बाहर की ओर निकला।
लेकिन नहीं! नेहा का भाई शिवम् मेन गेट पर ही खड़ा था।

तभी पीछे से नेहा की छोटी बहन रिंकी चिल्लाई –
पापा देखो! हमारे घर में चोर घुस आया है!”

आनन-फानन में वो मेन गेट की ओर भागे, लेकिन शिवम् ने उसे वहीं धर दबोचा और ज़मीन पर पटक दिया।
इधर नेहा के पापा आ गए और उसकी खूब पिटाई कर दी।

अब तक तो सब उसे चोर ही समझ रहे थे।
नेहा चाहकर भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी, और निखिल इतनी मार खाने के बाद भी चुपचाप सब सह रहा था।

इस तरह हुआ पूरा खुलासा

इधर निखिल को मार खाते देख, नेहा की मम्मी भी पूरी बात का अंदाज़ा लगा लेती हैं और नेहा को घर के अंदर जाने को कहती हैं।

अब पड़ोस के लोग भी आकर निखिल की पिटाई करने लगते हैं।
इस दृश्य को वहीं से गुज़रते हुए निखिल के ही मोहल्ले का एक बहुत ही बदमाश लड़का नीरज देखता है।

तब वह वहाँ निखिल को मार खाते हुए और नेहा को वहीं खड़ा देखता है।
और सबके सामने ही बड़ी बदतमीज़ी से नेहा से पूछता है –
नेहा भाभी, ये सब क्या हो रहा है?”
ये लोग निखिल को क्यों मार रहे हैं?”
आप इन लोगों को रोक क्यों नहीं रहे हो?”

अब नेहा के घरवाले और मोहल्ले वाले नेहा की तरफ़ देखने लगते हैं।
अचानक सबकी निगाह अपनी ओर देख, नेहा सहम जाती है।

नेहा डर से और निखिल को अपनी वजह से मार खाता हुआ देख, पूरी सच्चाई अपने पापा को बता देती है।
वो कहती है –
हाँ पापा, मैं जानती हूँ इसे… निखिल है और मैं पिछले एक साल से इसके साथ रिलेशनशिप में हूँ।”

इतना सुनकर नेहा के पापा ने उसे खींच कर एक थप्पड़ मारा।
नीरज ने भी निखिल के घर में कॉल कर उन्हें बुला लिया।

निखिल की इस हालत को देखकर उसके घरवाले, नेहा के पापा को भी खूब सुनाते हैं –
अपनी बेटी को भी संभाल कर रखिए। इसकी मर्जी के बिना निखिल यहाँ नहीं आता। गलती इसके अकेले की नहीं है।”

ये सब देखकर नेहा किसी से कुछ नहीं कह पाती और सिसक-सिसक कर रोने लगती है।
घरवालों ने नेहा को आज बहुत कुछ सुनाया।

उनमुक्त गगन में आज़ादी से उड़ने वाली नेहा आज सामाजिक पिंजरे के बंधन में बंध सी गई थी।

नेहा का बर्थडे – सबसे डरावना दिन

ये जन्मदिन सबसे डरावना और कभी न भूल पाने वाला जन्मदिन था।
जिसके साथ सबसे अच्छे पल बिताने का वादा था, वो विश भी नहीं कर पाया था।

नेहा आज के दिन बहुत रोती है।
और पूरे मोहल्ले में निखिल और नेहा के चर्चे होने लगते हैं।

नेहा को अब भी बहुत ज़्यादा दुख निखिल के लिए ही लग रहा था।
वो निखिल से बहुत ही ज़्यादा प्यार करती थी।

कुछ अन्य कहानियाँ –

अंतिम पंक्तियाँ – क्या होगा आगे?

क्या अब नेहा और निखिल कभी मिल पाएँगे?
इतना कुछ होने के बाद भी क्या निखिल नेहा से रिश्ता रखेगा?
क्या जितना प्यार नेहा निखिल से करती है, वो भी उससे उतना ही प्यार करता है?
या फिर इनका साथ यहीं तक था…?

जानने के लिए पढ़िए इस कहानी का अगला भाग।

our website – www.chandaal.com

you tube channel – chandaal

instagram – @isha.vibe143

Our Email – admin@chandaal.com

CHANDAAL
CHANDAALhttps://www.chandaal.com
Chandaal.com सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, एक आवाज़ है — उन कहानियों की, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। यह मंच समर्पित है उन सच्ची घटनाओं, दिल छू लेने वाली कहानियों, और कानूनी सच्चाइयों को, जो समाज में घटती तो हैं, लेकिन या तो दबा दी जाती हैं या सुनी नहीं जातीं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments