कहते है, जिंदगी हमें वहां ले जाती है जहां जाने की हम कभी सोच नहीं रहे होते।
कुछ ऐसा ही हुआ आरव और काव्या के साथ।
आरव एक छोटे शहर का साधारण लड़का था।
उसके पिता एक किसान और मां गृहिणी ।
घर की स्थिति उतनी मजबूत नही थी,
लेकिन आरव के सपने बहुत बड़े थे।
दूसरे तरफ काव्या एक बड़े शहर की लड़की थी।
उसके पिता एक बिजनेसमैन थे,
और उसे हर वो सुविधा मिली थी, जो हर कोई चाहता है।
दोनो की दुनिया अलग थी….
सोच अलग थी….
और शायद किस्मत भी।
पहली मुलाकात जो याद बन गई
एक छोटी सी टक्कर और बड़ा बसर हुआ।
दिल्ली के कॉलेज मे एडमिशन के लिए एक लंबी लाईन लगी थी।
आरव अपने दस्तावेज लेकर खड़ा था, तभी पीछे से किसी ने धक्का दिया।
सॉरी एक मीठी आवाज आई।
आरव ने पलटकर देखा….
वो काव्या थी।
उसकी मुस्कान मे कुछ अलग था कुछ ऐसा कि दिल मे उतर जाए।
कोई बात नही, आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
बस वही पल…..
उनकी कहानी की शुरूआत बन गया।
दो अलग दुनिया, एक रिश्ता
कॉलेज शुरू हुआ।
धीरे-धीरे आरव और काव्या दोस्त बन गए।
काव्या को आरव की सादगी पसंद थी।
आरव को काव्या की मासूमियत।
लेकिन दोनो के बीच एक दीवार थी… स्टेटस की दीवार।
काव्या अक्सर कैफे जाती, ब्राडेड कपड़े पहनती।
आरव हर वो चीज सोच समझकर खर्च करता।
फिर भी दोनो की बातचीत कभी खत्म नही होती थी।
दिल की बात जो दिल मे रह गई
एक एहसास जो शब्दो से परे था।
एक दिन बारीश हो रही थी।
काव्या छत पर खड़ी थी।
बारीश का आनंद ले रही थी।
आरव भी वहीं था।
तुम्हे बारीश पसंद है? काव्या ने पूछा।
हा… क्योंकि इसमे सब कुछ साफ हो जाता है, आरव ने कहा।
काव्या ने उसे देखा….
और पहली बार उसने महसूस किया कि
आरव को दोस्त से ज्यादा समझने लगी है लेकिन
उसने कुछ कहा नही।
आरव भी चुप रहा।
जब हकीकत सामने आई
एक सच्चाई जिसने सब बदल दिया।
एक दिन काव्या के पिता कॉलेज आए।
उन्होने आरव को काव्या के साथ देखा।
तुम कौन हो? उन्होने सख्त आवाज मे पूछा।
मै दोस्त हू आरव ने झिझक कर कहा।
काव्या के पापा ने हुसते हुए कहा!
दोस्ती अपने बराबरी वालो से की जाती है।
ये शब्द आरव के दिल मे चुभ गए।
उस दिन उसे अपनी गरीबी का इतना एहसास हुआ।
मजबूरी या फैसला?
दूरियां बढ़ने लगी।
उस घटना के बाद से आरव ने काव्या से दूरी बनाना शुरू कर दी।
काव्या बार-बार पूछती,
तुम मुझसे बात क्यो नही कर रहे?
लेकिन आरव के पास कोई जवाब नही था।
वो सिर्फ इतना जानता था…..
उसके पास देने के लिए प्यार था लेकिन काव्या के लिए तो पूरी दुनिया चाहिए थी।
खुद को साबित करने का जुनून
आरव ने ठान लिया कि वो खुद को बदलेगा।
वो दिन रात मेहनत करने लगा।
पढ़ाई, पार्ट टाइम जॉब, स्किल्स सीखना….
कई बार वो थक जाता….
कई बार टूट जाता….
लेकिन हर बार उसे काव्या की मुस्कान याद आती,
और फिर खड़ा हो जाता।
सालो बाद एक नई पहचान
पांच साल बीत गए।
अब आरव एक सफल इंसान था।
उसका नाम हर जगह लिया जाता था।
लेकिन उसके दिल मे आज भी काव्या थी।
किस्मत का खेल
दोनो की फिर से मुलाकात हुई।
आरव स्टेज पर था।
तालियो के बीच उसकी नजर सामने बैठी एक लड़की पर पड़ी।
वो काव्या थी।
वो पहले जैसी ही थी।
बस आंखो मे थोड़ी उदासी थी।
अधूरी कहानी पूरी हुई
दिल की बात आखिर कह दी गई।
इवेंट खत्म होने के बाद आरव काव्या के पास गया।
धीरे से पूछा ! कैसी हो?
काव्या की आंखे भर आई।
तुमने इतना बदल लिया खुद को…
लेकिन मुझे क्यों छोड़ दिया?
आरव चुप रहा… फिर बोला –
मैं तुम्हारे लायक बनना चाहता था।
काव्या मुस्कुराई और बोली…..
मुझे तुम्हारा साथ चाहिए था… तुम्हारी सफलता नहीं।
उस पल दोनो के आंखो मे आंसू थे।
लेकिन इस बार खुशी के थे।
एक नई शुरूआत
इस बार आरव ने काव्या का हाथ थाम लियाकृऔर कहा –
अब कभी नहीं छोड़ूगा।
काव्या ने मुस्कुराते हुए कहा –
अब मैं भी नही जाने दूंगी।
अब उनकी बातचीत सिर्फ ‘‘आई लव यू‘‘ तक नही थी।
बल्कि हम और आगे कैसे बढ़े तक पहुंच चुकी थी।
अब वो दोनो साथ काफी समय बीताने लगे।
काव्या आरव के काम को करीब से समझा।
उसने देखा कि आरव हर छोटे फैसले मे भी मेहनत और
ईमानदारी डालता था।
आरव अब काव्या को सिर्फ अपनी प्रेमिका के रूप मे नही बल्कि
एक समझदार और काम के प्रति ईमानदार होते हुए देखा।
धीरे-धीरे काव्या ने आरव के काम मे हाथ बटाना शुरू किया।
शुरूआत पहले तो वो छोटे-छोटे आइडिया देती लेकिन
जल्द ही उसकी सोच और समझ ने बिजनेस को नई दिशा दी।
अब ये सिर्फ प्यार की कहानी नही रही थी….
ये दो सपनो के एक साथ्ज्ञ पूरे होने की कहानी बन गई थी।
परिवार का सामना
सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब काव्या ने अपने पापा से आरव के बारे मे खुलकर बात की।
इस बार उसकी आवाज मे डर नही, भरोसा था।
पहले तो उसके पापा ने मना किया…
लेकिन जब उन्होने आरव की मेहनत,सफलता और
सबसे बढ़कर उसका सच्चा प्यार देखा तो
उनका नजरिया भी बदलने लगा।
कुछ समय बाद, उन्होने खुद आरव को घर बुलाया।
उस दिन आरव के दिल मे वही घबराहट थी,
जो सालो पहले थी।
लेकिन इस बार इतना फर्क था कि
उसके पास खुद पर विश्वास और काव्या का साथ था।
इस तरह दो अलग दुनिया के लोग..
एक कहानी बन गए।
- असली प्यार स्टेटस नही देखता,
- प्यार दिल से होता है, पैसे या हैसियत से नही।
- मेहनत कभी बेकार नही जाती।
- अगर आप सच्चे दिल से मेहनत करते है तो सफलता जरूर मिलती है।
- खुद पर विश्वास रखना सबसे जरूरी है।
- दुनिया कुछ भी कहे, अगर आपको खुद पर भरोसा है तो कुछ भी कर सकते हो।
रिश्तो को समय देना भी जरूरी है।
कभी-कभी हम सपनो के पीछे इतना भागते है कि
रिश्तो को भूल जाते है जो कि गलत है।
रिडर्स के लिए संदेश
दोस्तो,
जिंदगी मे प्यार और सफलता दोनो जरूरी है…
लेकिन सबसे जरूरी है सही समय पर सही फैसला लेना।
अगर आपके पास कोई ऐसा इंसान है ,
जो आपको बिना किसी शर्त के चाहता है।
तो उसे मत खोइए।
क्योंकि……
सफलता फिर भी मिल सकती है,
लेकिन सच्चा प्यार और साथ बार-बार नही मिलता।
कभी- कभी जिंदगी हमे दोबारा मौका देती है।
ऐसे इंसान से मिलाती है जो बिना कहे आपके दुख-सुख मे साथ दे,
लेकिन उसे पहचानना और सही तरह से निभाना हमारी जिम्मेदारी होती है।
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