कुछ प्यार बहुत शोर करते है।
स्टेटस, वादे, फोटो और दिखावा।
और कुछ प्यार चुपचाप पैदा होते है –
काम के बीच, जिम्मेदारियो के बोझ मे,
और उन लोगो के दिल मे
जो खुद को सबसे आखिर मे रखते है।
यह कहानी उसी तरह के प्यार की है।
न फिल्मी, न परफेक्ट
बल्कि सच के बहुत करीब।
सपनो से ज्यादा जरूरतो मे फसा इंसान
नील 27 साल का था।
नोएडा मे एक आइटी कंपनी मे जॉब करता था।
तनख्वाह ठीक-ठाक थी,
पर खर्च उससे ज्यादा।
पिता रिटायर हो चुके थे।
मां की तबीयत अक्सर खराब रहती थी।
छोटा भाई अभी पढ़ रहा था।
नील की जिंदगी मे ‘‘प्लान‘‘ नाम की चीज
सिर्फ EMI और जिम्मेदारियो तक सीमित थी।
वह अक्सर सोचता,
प्यार जैसी Luxury मेरे लिए नही है।
रिया बाहर से मजबूत, अंदर से थकी हुई
रिया 25 साल की थी।
एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी मे काम करती थी।
आत्मनिर्भर, कॉन्फिडेंट और दिखने मे खुश।
लेकिन घर के हालात अलग थे।
माता – पिता के रिश्ते मे कड़वाहट थी।
बाते कम और शिकायते ज्यादा।
रिया ने बहुत छोटी उम्र मे सीख लिया था कि
हर मुस्कान खुशी नही होती।
उसे ऐसा इंसान चाहिए था,
जिसके सामने उसे Strong बनने की जरूरत न पड़े।
पहली मुलाकात
पहली मुलाकात कोई खास नही फिर भी अलग।
नील और रिया की मुलाकात
एक कोवर्किंग स्पेस मे हुई।
दोनो अलग-अलग कंपनियो से थे,
पर जगह एक ही थी।
पहली बातचीत बस इतनी थी,
ये चार्जर फ्री है?
हां यूज कर लो।
कोई Spark नहीं,
कोई दिल की धड़कन नही।
लेकिन अगले दिन फिर मुलाकात हुई।
और फिर उसके अगले दिन भी।
पहचान जब इंसान दिखावा नही करता
नील ज्यादा बोलता नही था।
रिया ज्यादा बोलती थी।
लेकिन नील सुनता था – पूरी तरह।
रिया ने महसूस किया कि
नील Advice नही देता,
Interrupt नही करता,
बस मौजूद रहता है।
और आजकल ‘‘ मौजूद रहना‘‘ सबसे बड़ी Rarity है।
दोस्ती – बिना लेबल का रिश्ता
धीरे – धीरे कॉफी साथ पी जाने लगी।
लंच टाइम साथ हो गया।
रिया अपनी बाते बताती –
ऑफिस, घर, थकान।
नील अपनी बाते कम बताता,
पर जब बताता तो ईमानदारी से।
कोई Impress करने की कोशिश नही।
कोई Future नही, बस सच।
एहसास – जो अचानक नही आता
एक दिन रिया बीमार थी।
ऑफिस नही आई।
नील को अजीब लगा।
उसने मेसेज किया,
‘‘सब ठीक है?‘‘
रिया ने जवाब दिया:
हां बस कमजोरी है।
नील ने बिना ज्यादा बोले
शाम को सूप भेजवा दिया।
उस पल रिया को समझ आया –
यह Caring दिखाने वाला इंसान नही,
Care करने वाला इंसान है।
डर – जो प्यार से पहले आता है
नील को एहसास होने लगा था कि
वह रिया की परवाह करने लगा है।
यही उसे डराता था।
वह जानत था कि
उसके पास देने के लिए Luxury नही,
बस Stability की कोशिश है।
उसने एक दिन साफ कहा:
‘‘मेरी जिंदगी आसान नही है।‘‘
रिया ने जवाब दिया:
‘‘मुझे आसान जिंदगी नही चाहिए।‘‘
लेकिन नील का डर गया नही।
समाज और प्रेक्टिकल बाते
जब समाज और प्रेक्टिकल बाते बीच मे आती है।
रिया के घर वालो को दोस्ती की भनक लगी।
सवाल शुरू हो गएः
‘‘लड़का क्या करता है?
कितना कमाता है?
भविष्य सिक्योर है?‘‘
नील को जब ये सब पता चला,
तो उसने खुद को छोटा महसूस किया।
उसे लगा वह रिया को वही Instability देगा।
जिससे वह भागना चाहती है।
दोनो के बीच दूरी
दूरी जो प्यार को चुप करा देती है।
नील ने धीरे-धीरे खुद को पीछे खीच लिया।
कम मेसेज , कम मुलाकात।
रिया ने पूछा:
‘‘कुछ बदला है क्या?‘‘
नील ने कहा:
‘‘नहीं बस काम ज्यादा है।‘‘
लेकिन सच दोनो जानते थे।
अलग होना बिना लड़ाई के
एक दिन नील ने कहा:
‘‘शायद हमें यही रूक जाना चाहिए।‘‘
रिया ने बहस नही की।
उसने सिर्फ पूछा:
‘‘डर के कारण या यकीन की कमी से?‘‘
नील चुप रहा।
वही जवाब था।
खाली समय कुछ अधूरा
खाली समय जब सब कुछ अधूरा लगता है।
अलग होने के बाद नील काम मे और डूब गया।
रिया करियर मे आगे बढ़ती रही।
लेकिन रातो मे दोनो का मन उसी सवाल पर अटकता
‘‘अगर तब थोड़ा और हिम्मत की हाती तो….?‘‘
समय का इंसान को बदलना
समय जो इंसान को बदल देता है।
दो साल बीत गए।
नील ने जॉब स्वीच किया।
अपनीFinancial Condition सुधारी।
खुद को Mentally मजबूत किया।,
रिया ने भी अपने रिश्ते और Boundaries
को समझा।
दोनो अलग-अलग आगे बढ़े –
पर एक अधूरा Chapter साथ लिए ।
फिर मुलाकात मे एहसास
मुलाकात जब पुराना एहसास लौट आता है।
एक Industry Event मे फिर आमना-सामना हुआ।
पहले कुछ सेकंड बस देखा।
फिर हल्की मुस्कान।
वक्त बदला था,
पर सुकून वही था।
बातचीत जो पहले नही हुई
नील ने कहा:
मै खुद को कम समझता था।
रिया ने कहा:
और मै तुम्हे ज्यादा समझती थी।
इस बार कोई भागा नही।
फैसला – इस बार डर नही
नील ने साफ कहाः
अब मै हालात से नही भागूंगा।
रिया ने जवाब दिया:
और मैं इस बार आधा दिल से रिश्ता नही रखूंगी।
सब कुछ तुरंत आसान नही हुआ।
पर नील की ईमानदारी और
रिया की स्थिरता ने रास्ता बनाया।
धीरे – धीरे सवाल शांत हुए।
सच का सामना
कुछ ही हफतो बाद रिया ने कहा
हमे घर मे बात करनी चाहिए।
छुपकर रिश्ता रखना मुझे ठीक नही लगता।
नील जानता था कि यही असली परीक्षा है।
वह अब पहले जैसा नही था।
नील ने कहा –
मै तुम्हे किसी असुरक्षा मे नही डालना चाहता।
रिया ने कहा –
मुझे असुरक्षा से नही झूठ से डर लगता है।
रिया ने अपने घर पर खुलकर बात की ।
सवाल फिर आए।
लेकिन इस बार नील ने खुद को छोटा महसूस नही किया।
वह सीधे शांत शब्दो मे बोला –
मेरे पास कुछ नही है लेकिन मै भागता नही हूं ।
जो जिम्मेदारी है, निभाता हूं, और रिया के साथ भी ऐसा ही करूगा।
शायद पहली बार उसके शब्दो मे डर नही, आत्मविश्वास था।
लोग हमेशा परफेक्ट जवाब नही सुनना चाहते,
वे स्थिरता देखना चाहते है।
छोटे – छोटे कदम
रिश्ता स्वीकार होने मे समय लगा।
कोई चमत्कार नही हुआ।
ना अचानक सब खुश हो गए।
लेकिन धीरे – धीरे बाते सहज होने लगी।
नील ने अपने घर मे भी रिया के बारे मे बताया।
मां ने सिर्फ एक सवाल पूछा –
वह तुम्हारे साथ खुश रहेगी?
नील ने बिना सोचे कहा-
मै कोशिश पूरी करूंगा।
साथ का असली अर्थ
रिश्ता आगे बढ़ा, लेकिन जिंदगी अब भी आसान नही थी।
मां की तबीयत, भाई की पढ़ाई, रिया का ऑफिस प्रेशर सब वही था।
फर्क सिर्फ इतना था कि वे अकेले नही थे।
अचानक से नील की नौकरी छूट गई।
दो महीने संघर्ष रहे। इंटरव्यू, रिजेक्शन, इंतजार।
लेकिन इस बार नील अकेला नही था।
जीत – जो शोर नही करती
आखिरकार नील को नई नौकरी मिली।
पहले से बेहतर प्रोफाइल, बेहतर सैलरी।
उन्होने कोई बड़ी पार्टी नही की।
बस एक शांत सी शाम, वही पुराना कोवर्किंग स्पेस,
जहा से सब शुरू हुआ था।
नील ने कहा –
अगर हम तब अलग नही होते,
तो शायद मै खुद को बदल नही पाता।
रिया ने मुस्कुराकर कहा –
और अगर हम दोबारा नही मिलते,
तो शायद मै भरोसा करना भूल जाती।
कभी-कभी दूरी हमे मजबूत बनाने के लिए आती है।
ताकि हम लौटकर बेहतर इंसान बन सके।
कुछ महीनो बाद दोनो ने शादी का फैसला लिया।
बिना ज्यादा तामझाम, बिना दिखावे के।
उनकी शादी की तस्वीरे सोशल मीडिया पर कम थी,
लेकिन उनके बीच का भरोसा गहरा था।
नील अब भी जिम्मेदारियो वाला इंसान था।
रिया अब भी मजबूत थी।
प्यार की परिभाषा
सालो बाद जब कोई उनसे पूछता,
आपकी लव स्टोरी कैसी थी?
तो वे हंसकर कहते,
थोड़ी देर से समझ आई।
उनका प्यार शोर वाला नही था।
कोई बड़े-बड़े वादे नही,
कोई परफेक्ट सीन नही।
बस दो लोग,
जो डर से बड़े हो गए।
प्यार हमेशा सही समय पर नही आता।
कभी वह गलत समय मे आता है,
ताकि हमे सही इंसान बना सके।
नील और रिया ने सीखा –
खुद को कम मत समझो।
सामने वाले के डर को उसकी कमजोरी मत समझो।
क्योकि असली प्यार वही है,
जो कहता है –
‘‘इस बार डर नही।‘‘
Readers Message/Question
अब आप खुद से पूछिए –
अगर जिंदगी आपको दूसरी बार माैंका दे,
तो क्या आप डर को चुनेंगे या प्यार को?
क्या आपने डर के कारण किसी को खोया है ?
क्या आज भी आप मानते है कि सादा प्यार जिंदा है ?
कमेंट मे लिखिए –
आपकी बात किसी और के काम आ सकती है।
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