Monday, April 20, 2026
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संघर्ष से भरी महिला की जिंदगी| Emotional Story In Hindi

संघर्ष भरा जीवन और आने वाली अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बाद आखिरकार एक दिन जूही अंदर से टूट जाती है।
एक पत्नी, एक बेटी के रूप में जीवन के अनेक संघर्षों को देखने वाली जूही की कहानी आपको जरूर पसंद आएगी।

जूही का परिवार

जूही एक मिडिल क्लास फैमिली से थी। जूही के पापा सरकारी कर्मचारी थे।

साथ ही परिवार में उसकी मम्मी और छोटा भाई सौरभ था। वो लोग भिलाई के रहने वाले थे।
छोटा परिवार और पिता के शासकीय कर्मचारी होने के कारण जूही का परिवार बेहद खुशहाल था।

यूँ तो जूही के पापा परिवार की हर जरूरत को पूरा करने की कोशिश करते थे। वे एक जिम्मेदार इंसान भी थे।
बस कुछ कमी थी तो वो थी उनके नशे की लत

एक पिता के रूप में वे अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखते थे। उनका साधारण व्यक्तित्व उनके बच्चों में भी झलकता था।
साथ ही एक पति के रूप में वे अपनी पत्नी के साथ भी अच्छा समय व्यतीत करते थे।

घूमना-फिरना, फिल्म देखने जाना — ये सब महीने में एक-दो बार तो हो ही जाता था।

जब छूटा अपना शहर

अब जूही की स्कूल की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी। उसका भाई सौरभ भी दसवीं की बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुका था।
बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद पूरा परिवार साथ घूमने जाने का प्लान बनाना शुरू कर देता है। दोपहर का समय था।
साथ घूमने की प्लानिंग चल ही रही होती है कि तभी जूही के पापा का कॉल आता है।

कॉल में बहुत ही मायूसी भरी हुई एक आवाज आती है। जूही के पापा ने कहा – “जूही बेटा, मेरा ट्रांसफर किसी दूसरे शहर में हो गया है।”

अपना घर, जहाँ जूही और उसके परिवार ने कई वर्ष बिताए थे। जहाँ जूही और उसके भाई का पूरा बचपन बीता था।
जहाँ हर गली, हर चौराहे पर उनकी यादें जुड़ी हुई थीं। उस जगह को अचानक छोड़कर जाने की बात सुनकर जूही पल भर के लिए सदमे में चली जाती है।

थोड़ी देर पहले तक जो परिवार हँसी-खुशी घूमने जाने की प्लानिंग कर रहा था, वहाँ अचानक से एक सन्नाटा सा छा जाता है।
सब चुपचाप उदास मन से एक जगह पर बैठ जाते हैं।

शाम को घर आने के बाद जूही के पिता ने अपने बच्चों का मन हल्का करने के लिए उनसे कई तरह की बातें समझाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि अगर शासकीय नौकरी में नहीं होते तो यह जगह छोड़कर भी नहीं जाते।

आखिरकार मन मारकर सबने सामान बांधना शुरू किया। ऐसा लग रहा था जैसे जूही अपना घर नहीं, अपना मन, अपनी आत्मा — सब कुछ यहीं छोड़ कर जा रही थी।

जूही के पापा का छोड़ जाना

अभी तक जूही नई जगह की हवा में ठीक से घुल-मिल भी न पाई थी।
जूही ने खुश रहना शुरू ही किया था कि एक और तकलीफ उनका इंतज़ार कर रही थी।

एक दिन अचानक, जूही के पापा की तबीयत खराब हुई। मानो एक पल में पूरे घर में हलचल सी मच गई।

पापा को हॉस्पिटल ले जाया गया। अब वहाँ उनका पूरा बॉडी चेकअप किया गया।
जूही को बेसब्री से रिपोर्ट आने का इंतज़ार था।

उसकी हालत देखकर डॉक्टर ने पहले उसे थोड़ा शांत किया।
और उसे कहा – “इनके ठीक होने की उम्मीद बहुत कम है, लेकिन हम पूरा प्रयास करेंगे।”

इतना सुनते ही जूही की आँखों से आंसू की एक बूंद टपकी। लगा मानो वो किसी को गले लगाकर ज़ोरों से रोना चाहती हो।
जूही दुखी होने के साथ-साथ अपनी मम्मी को यह बात बताने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही थी।

घर की बड़ी बेटी होने के कारण अब यह जिम्मेदारी भी जूही की बनती थी कि वो खुद को और अपने परिवार को भी संभाले।
उसने यह बात अपनी मम्मी को बताई।

डॉक्टर ने कहा कि तुम्हारे पापा के पास ज्यादा टाइम नहीं है। उनका लीवर खराब हो चुका है।
आगे चलकर उन्हें लकवे की भी शिकायत हो सकती है।

जूही ने जो सुना उस पर वो यकीन नहीं कर पा रही थी। डॉक्टर से कहा – “सर, ये सच है?”
तो डॉक्टर ने कहा – “हाँ, ये सच है!”

अब आप लोगों को उन पर ज्यादा ध्यान देना होगा और उन्हें नशे से बिल्कुल ही दूर रखना होगा।

कुछ दिनों के बाद उसके पापा की तबीयत और भी खराब हो गई।
डॉक्टर ने बताया कि वो कोमा में चले गए हैं।
छह माह तक कोमा में रहने के बाद उनका निधन हो गया।

जूही ने संभाली घर की जिम्मेदारी

घर की बड़ी बेटी होने के कारण जूही अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी समझती है।
एक दिन अचानक से जूही को उसके पापा के ऑफिस से कॉल आता है।

जूही से कहा जाता है कि उसके पापा की जॉब उनके बच्चे या पत्नी कर सकते हैं।
पापा के गुजर जाने के बाद मम्मी की ऐसी हालत नहीं थी कि वो काम पर जा सके।
भाई अभी छोटा था, जिस पर जिम्मेदारियों का बोझ डाला जाना सही नहीं होता।

तब जूही ने जॉब कर घर की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया।
अगले दिन से ही उसने काम पर जाना शुरू कर दिया। इससे घर के हालात फिर से सुधरने शुरू हुए।

लेकिन यहाँ एक समस्या ने फिर से जन्म लिया —
वो था जूही की शादी के बाद घर का खर्चा कैसे चलेगा?

वो तो एक लड़की है, आज नहीं तो कल उसे ससुराल जाना ही था — यह सोचकर उसका भाई सौरभ चिंतित रहने लगा।

इधर जूही भी घर को इस तरह छोड़कर शादी नहीं करना चाहती थी।
लेकिन माँ के बार-बार कहने पर उसने शादी के लिए हाँ कर दी।

जूही का वैवाहिक जीवन

जूही दिखने में सुंदर थी, जिस कारण उसे कई जगह से शादी के लिये रिश्ते आ रहे थे । लेकिन जूही सुंदर होने के साथ-साथ एक पढ़ी लिखी लड़की भी थी । इस कारण वह जल्दबाजी में फैसला न लेते हुए बेहद सोच-समझकर वैवाहिक जीवन की शुरुवात करना चाहती थी ।

एक अच्छे जीवन साथी की तलाश करते हुए जूही की मुलाकात विकास नाम के लड़के से हुई । विकास काफी पढ़ा-लिखा और बेहद जिम्मेदार लड़का था । कुछ समय की मुलाकात में ही वे दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गये थे ।

अब जूही भी बेझिझक विकास के साथ कहीं भी घूमने चल देती थी । इस तरह आखिरकार जूही की तलाश पूरी हुई। उसने अच्छे से सोच-विचार कर विकास को अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला किया ।

जूही के इस फैसले का सभी घरवालों ने भी खुशी से स्वागत किया । दोनों की शादी हो गई और एक बहुत प्यार भरे सफर की शुरुवात हो गई ।

उसको अपने मायके याद आ रही थी । जिस कारण विकास उसे मायके छोड़ कर वापस चला गया ।

उसके जाने के बाद से जूही ने विकास से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसका कॉल नहीं लगा।

जूही ने सोचा शायद विकास ऑफिस के काम में बेहद व्यस्त होगा जिस कारण कॉल नहीं उठा रहा है ।

आज तीन दिन बाद पता चला की खाई में गिरने से विकास की मौत हो गई है ।

लगा मानो उसके जीवन का अब कोई उद्देश्य बचा ही नहीं है ।

यह सोच-सोच कर परेशान होती कि आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यूं होता है ? अंदर से पूरी तरह टूट चुकी जूही ने फिर एक बार खुद को संभालने की को कोशिश की ।
लेकिन आज लग रहा था कि वो खुद से भी हार चुकी है ।

जूही का दूसरा विवाह

जूही की शादी एक महेश नाम के लड़के से हुई। वो दिल्ली में आटा चक्की की दुकान चलाता था।
दिल्ली में रहने के कारण जूही को अपनी जॉब छोड़नी पड़ती है।
महेश अपने चाचा-चाची के साथ वहाँ रहता था।

अब जूही महेश को ही अपना सब कुछ मानकर हर सुख-दुख में उसके साथ चलने को तैयार थी।
लेकिन फिर एक समय की झोली में जूही के लिए दुख भरे पल शेष थे।

विवाह के शुरुआती समय में तो महेश जूही के साथ बहुत प्यार और इज्जत से रहता था।
उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करता था। उसे घुमाना-फिराना, उसके लिए महंगे-महंगे सोने-चाँदी के उपहार लाता था।
इससे जूही की ज़िंदगी भी अब सुधरने लगी थी।

लेकिन फिर एक दिन काम में नुकसान होने के कारण महेश शराब पीकर घर आया जिसे देख कर जूही गुस्सा हो गई । गुंस्से में उसने महेश को खूब सुनाया जिस पर महेश भी नाराज हुआ और जूही के साथ बदसलूकी करने लगा ।

उस दिन तो जूही शांत रही मगर अगे दिन सुबह होते ही वा अपना सामान बांधने लगी । उसे सामान बांधता देख महेश समझ गया कि रामत वाली बात को जूही अब तक भूली नहीं । जिददी स्वाभाव वाली जूही को अगर समय रहते रोका नहीं गया तो वो सच में महेश और घर को छोड़कर चली जायेगी ।

इसलिये महेश ने तुरंत उसके सामने हाथ जोड़ लिये और रात वाली बात के लिये खूब माफी मांगी । अपने भविष्य और अपने आने वाले बच्चों की खुशी को देखते हुए जूही ने उससे वचन लिया कि वो दोबारा कभी ऐसा न करे ।

फिर एक बार एक प्रेमभरा वैवाहिक जीवन पटरी पर लौटा और दोनों अच्छे से साथ रहने लगे ।

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क्या जूही को महेश से हमेशा प्यार मिलेगा — ऐसा सोचना सही था?
या फिर जूही की ज़िंदगी में कुछ ऐसा होने वाला था,
जिसके बारे में जूही को भनक तक नहीं थी?

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