Sunday, April 19, 2026
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दिल छू लेने वाली कॉलेज लव स्टोरी – प्यार की पहली आहट और अधूरी मोहब्बत

दिल को छू लेने वाली कहानी – “प्यार की पहली आहट“

ये कहानी है, काव्या और समर की। काव्या एक अपर मिडिल क्लास फैमिली से थी। उसके घर में पिता (कमल), मम्मी (कोमल) और एक बड़ा भाई अनुप था। वो चंडीगढ़ की रहने वाली थी। उसके पापा प्राइवेट बैंक में मैनेजर थे। उसकी मम्मी का एक पार्लर था। कमल और कोमल ने अपने दोनों बच्चों को ही एक अच्छी एजुकेशन दी थी।

अनुप की भी पढ़ाई पूरी हो गई थी। वो नौकरी करने के लिए इलाहाबाद चला गया था। काव्या की भी स्कूल की पढ़ाई खत्म हो गई थी। वो अपने भाई अनुप के साथ इलाहाबाद रहने चली गई। कमल ने उसके कॉलेज का एडमिशन वहीं करा दिया।

अब यहां से शुरू होती है – काव्या और समर मुलाकात से लेकर बिछड़ने तक सफर।

काव्या का कॉलेज में पहला दिन था। उसके लिए वो शहर भी नया था और वहां के लोग भी। वो काफी सीधी स्वभाव की थी। कॉलेज में उसे अजीब सा लग रहा था क्योंकि वो शहर बड़ा था। वहां के लोग खुलकर बात करने वाले और चंचल स्वभाव के थे।

काव्या और समर की मुलाकात

अब कॉलेज का पहला दिन तो वो ले देकर काट लेती है पर दूसरे दिन फिर वो कॉलेज आती है। उस दिन कॉलेज में कुछ सीनियर लोग रैगिंग करते रहते हैं, उनमें से एक समर होता है। तभी समर की नजर काव्या पर पड़ती है। उसे देखकर उसके मन में एक शायरी आती है। समर काफी चंचल और उसे शायरी का बहुत शौक था। अब वो काव्या से कहता है –

“चेहरा तेरा एक खूबसूरत नजारा, जैसे हो कोई खुशनुमा सवेरा।
देखकर तेरा ये चेहरा, दिल खुश हो गया मेरा।”

मानो काव्या की सादगी, उसकी मासूमियत देखकर वो उसमें खो जाता है। अपने दोस्तों से कहता है – सब क्लास में जाओ अब रैगिंग खत्म हुई। सब अपने क्लास चले जाते हैं।

2 मिनट तक तो काव्या भी कुछ नहीं कहती है, उसके बाद रैगिंग को रोकने के लिए वो समर से थैंक यू कहती है। अब काव्या वहां से जाने लगती है।

तभी समर उसका हाथ पकड़ लेता है। तब काव्या को मानो ऐसा लगता है जैसे उसे कोई करंट सा लग गया हो। उसके शरीर का रोम-रोम जाग उठता है। ये था काव्या और समर के प्यार की पहली आहट की पहली मुलाकात। उसके बाद काव्या समर को बिना कुछ कहे वहां से चली जाती है।

काव्या और समर के प्यार की शुरुआत

अब ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं। काव्या को पढ़कर इंजीनियर बनना था। इसलिए वो अपने इस अहसास को अपने अंदर कहीं दफन कर देती है। ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं।

समर भी उसके पढ़ने और सीधे-साधे स्वभाव को देखकर उसके जैसे स्वभाव वाला बनने की कोशिश कर रहा था। वो अब काव्या के साथ अधिक समय बिताने लगा था। काव्या भी उसके इस बदलते रूप को देखकर उसकी तरफ आकर्षित हो रही थी। आखिर कब तक वो अपने प्यार की आहट को अपने मन में छिपाकर रखती। आखिरकार वो समय आ ही गया जब काव्या और समर ने एक-दूसरे अपने प्यार का इजहार किया।

अब समर भी काव्या का साथ दे रहा था, वो उसके सपने को पूरा करने में मदद कर रहा था। दोनों ही अपने रिश्ते को ईमानदारी से निभा रहे थे क्योंकि ये काव्या का पहला प्यार था और कहीं न कहीं समर का भी ये पहला प्यार था।

“वो कहते हैं न कि किसी से अगर सच्चा प्यार किया जाए,
तो ये एक खूबसूरत रिश्ता, सुनहरा एहसास बन जाता है।”

समर का ये बदला रूप देखकर सब हैरान थे कि आखिर एक लड़की की जिंदगी में आने से इतना परिवर्तन कैसे? पर समर के इस प्यार के बारे में उसके घर वाले को पता नहीं था।

समर के पापा का शक

एक दिन समर और काव्या एक साथ घूमने गए होते हैं और समर को पता नहीं था कि उसके पापा उससे मिलने आने वाले होते हैं। उसे जरा भी एहसास नहीं था कि आगे क्या होने वाला था?

समर एक बड़े बिजनेसमैन का बेटा था। उसके पापा का सपना था कि वो पढ़-लिखकर एक बड़ा बिजनेसमैन बने। पर उसके पापा ने उसे रास्ते में एक पार्क में काव्या के साथ देख लिया।

काव्या और समर भी अपने डेट का मजा ले रहे होते हैं। एक-दूसरे से जिंदगी भर साथ निभाने के वादे कर रहे होते हैं। उन्होंने उस एक पल में अपनी सफलता और अपनी पूरी जिंदगी को देख लिया।

अब कॉलेज वालों ने और समर के रूम में रहने वालों से उसके पापा ने सारी बात पूछी। सभी ने सारी बातें उन्हें कह दीं। अब समर के पापा बहुत ही गुस्से में उसके इंतजार में बैठे थे।

अब समर घूमकर अपने रूम आता है। वहां उसके पापा को देखकर मानो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। उसके पापा उससे सवाल करते हैं, पर वो चुप बैठा होता है।

उसके पापा काव्या को बुलाने को कहते हैं। वो वहां आती है। समर से उसके पापा पूछते हैं –

“समर! क्या काव्या के साथ तुम्हारा कुछ रिश्ता है?”

तब थोड़ी देर तो वो चुप रहता है, उसके बाद वो सबके सामने काव्या और अपने रिश्ते को झूठ बता देता है।

ये सब सुनकर काव्या थोड़ी देर के लिए वहीं खड़ी रह जाती है। उसके मुंह से कुछ आवाज नहीं निकलता है और आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।

अब उसके पापा समर के साथ एक आदमी छोड़कर जाते हैं, जो उन्हें उसकी पल-पल की खबर देता रहेगा। काव्या वहां से चली जाती है।

दोनों ही कुछ दिन तक कॉलेज नहीं आते हैं। उसके बाद उनकी परीक्षा शुरू होने वाली होती है। दोनों ने लगभग 1 सप्ताह बाद एक-दूसरे को देखा था।

उस दिन समर के पापा जिसको निगरानी के लिए छोड़कर गए थे, वो उसके साथ नहीं आया होता है। काव्या ने समर से बहुत बात करने की कोशिश की पर उसने उससे बात नहीं की।

अब छुट्टी के वक्त वो खुद आगे से आकर कहता है – “अब हमारा रिश्ता खत्म, यहीं तक का हमारा साथ था।”
इतना कहकर वहां से चला जाता है।

काव्या ये सब सुनकर बहुत ही गहरा सदमा लगता है। मन ही मन वो सोचती है –
“मैंने इसके लिए इतना कुछ किया, अब तो मैंने अपने रिश्ते के लिए अपने पापा को भी मना लिया है, इसने मुझे आधे रास्ते में ही छोड़ दिया।”

काव्या का दर्द

और वो मन में सोचती है कि –

“मैंने कभी नहीं चाहा कि मैं किसी के लिए परेशानी बनूं, किसी के लिए बोझ बनूं, किसी के दुख का कारण बनूं, मैंने हमेशा लोगों को खुश देखना चाहा है…
पर न जाने उसने मेरा साथ क्यों छोड़ा या फिर उसने कभी मुझे कुछ समझा ही नहीं होगा।”

ऐसे ही उसके मन में कई सवाल आते हैं। वो सोचती है कि प्यार नहीं होता, लोग सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अपनी जिंदगी से निकाल फेंकते हैं। और भी हजारों बातें उसके जहन में थीं, वो किसी से बयां नहीं कर पा रही थी।

अब सवाल ये है कि…

क्या कभी और काव्या किसी से प्यार कर पाएगी?
या फिर उसका प्यार पर से भरोसा उठ जाएगा?
समर उसके पास लौटकर आएगा?
या उस दिन का अलविदा कहना ही उसका आखिरी अलविदा था?
आखिर इनकी प्यार की पहली आहट की कहानी यहीं खत्म हुई?
या और भी कुछ अभी देखना बाकी है?

प्यार एक बेहद खूबसूरत अहसास है और उससे भी खूबसूरत रिश्ता। शायद इसीलिए जब दिल टूटता है, तो आवाज नहीं होती लेकिन चुभन महीनों, सालों या शायद उम्र भर रहती है।

जानने के लिए पढ़ते रहिए इस कहानी का अगला भाग………..

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