जंगल के बीच में डैम के ऊपर खड़ा अंकित किसी खास के आने का इंतज़ार कर रहा था। तभी सामने से एक बहुत ही ख़ूबसूरत सी लड़की अंकित की ओर आती दिखाई दी। चेहरे पर मुस्कान लिए हुए, अपने बालों को सहलाती, मानो ख़ूबसूरती की मिसाल खुद चलकर अंकित की ओर ही आ रही थी। पल भर के लिए मानो दिल की धड़कनें थम सी गई हों।
गांव के बच्चों की पूरी टोली लेकर आई थी वो!! लेकिन सबसे अलग लग रही थी। डैम के नीचे बहते पानी में भी इतनी चमक न थी जितना वो चमक रही थी। जैसे भगवान जी ने स्वर्ग से एक अप्सरा को गलती से धरती पर भेज दिया हो। अंकित की नज़रें पलकें झपकाने तक को तैयार न थीं। कहीं कोई स्माइल, कोई पल उसे देखने का छूट न जाए।
हाँ ये वहीं तो है… वही लड़की जिससे मिलने अंकित इतनी दूर तक आया था। अंकित विश्वास नहीं कर पा रहा था कि सच में इसी लड़की ने उसका प्रेम स्वीकार किया था।
सच में बहुत ही रोचक प्रेम कहानी है दोनों की। आइए शुरू से जानते हैं कि क्या हुआ इनकी लाइफ़ में और आगे क्या होने वाला है।
मोहब्बत की पहली मुलाकात
सुबह की सूरज की पहली किरण के साथ ही अंकित जल्दी उठकर तैयार हो जाता है। उसे आज अपनी गर्लफ़्रेंड से मिलने जाना था। वो लड़की जिसे आज तक उसने सामने से कभी नहीं देखा था।
देखा था, तो बस ख़्वाबों और तस्वीरों में। अनु नाम था उसका। चेहरे से बिल्कुल मासूम सी लड़की, मुस्कुराती थी तो जैसे वक़्त कुछ पल के लिए रुक सा जाता था। आज उससे बात करते हुए दो माह बितने को आ चुके थे। सोशल मीडिया पर फ्रेंड्स फ़ॉरएवर नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में मिले थे दोनों। स्क्रॉल करते हुए अंकित ने एक “हाय” का मैसेज छोड़ा था। वहीं शुरुआत हुई थी दोनों की बातचीत की।
बातें तो पूरी-पूरी रात चलती थीं। अनु की वो प्यारी सी आवाज़ जिसे न सुनो तो नींद ही न आती थी। रात का बोला हुआ वो “आई लव यू” जैसे नींद की दवा थी।
रोज़-रोज़ होने वाली बातें मिलने की चाहत को और बढ़ा जाती थीं। आख़िरकार एक दिन मिलने का रास्ता मिल ही गया। अनु ने घर पर कहीं और जाने की बात कहकर मिलने आना तय किया। जगह थी गांव के बाहर वाली डैम। हाँ… वो थोड़ी दूर ज़रूर थी लेकिन अपनी मोहब्बत से मिलने के लिए अनु इतना तो कर ही सकती थी।
अंकित भी जल्दी तैयार होकर पहुँच गया उस डैम के किनारे जहाँ अपनी मोहब्बत की पहली झलक देखने का इरादा था। अब शुरू हो चुकी थी…
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इंतज़ार की घड़ियां
काफ़ी समय तक डैम के ऊपर खड़े रहने के बाद भी जब अनु नहीं आई। इस दौरान अंकित के मन में कई तरह के विचार आने लगे। शायद वो नहीं आएगी? शायद उसे घर से निकलते नहीं बन रहा होगा। ऐसे ही कई तरह की बातें मन में चलने लगीं।
एक तरफ उसे देखने, उससे मिलने की छटपटाहट मन में थी तो वहीं दूसरी ओर उसके न आने का डर भी कहीं न कहीं मन को खाए जा रहा था।
इसी जद्दोजहद में लगे अंकित को सामने से आती हुई एक मासूमियत से भरी हुई लड़की दिखाई दी। दोनों पांव में बंधी पायल से झम-झम की आवाज़ करती हुई। दूध जैसी गोरी, अपने बालों को सहलाती हुई, एक बेहद मधुर, मीठी सी मुस्कान लिए हुए। हाँ, वो अनु ही थी… अंकित की अनु।
गांव के बच्चों की पूरी टोली लिए हुए वो लड़की अंकित की ओर ही आ रही थी। करीब आते ही अंकित ने अपना हाथ उसकी ओर हाथ मिलाने के लिए बढ़ाया। सच में कितना रोमांटिक भरा पल था वो, जिसे शब्दों से बयां भी नहीं किया जा सकता। अंकित एक तरफ उसकी मासूमियत और दूसरी तरफ उसकी नादानी को देखकर समझ नहीं पा रहा था कि क्या बोले। उसने कहा –
“तुम किसी फ्रेंड को लेकर नहीं आ सकती थी? पूरे गांव के बच्चों को लेकर आ गई हो। ये बच्चे गांव तुम्हारे और मेरे बारे में सबको बता देंगे।”
इस पर वो थोड़ी हंसी और बोली –
“तुम्हें डर लग रहा है क्या? तुम हो न मुझे अपने साथ ले जाने के लिए।”
इस पर अंकित भी हंस पड़ा, मानो मज़ाक-मज़ाक में वो आगे की ज़िंदगी की चर्चा कर रहे हों।
जंगल की यादगार लम्हें | Hindi Love Story
अनु ने साथ आए बच्चों को वहीं रुकने को कहा। वह सिर्फ अपने छोटे भाई को साथ ले जाना चाहती थी। अंकित ने उसे भी ले जाने से मना किया, लेकिन अगर अनु अकेले होती तो कोई उसके घर में बता सकता था।
न चाहते हुए भी अंकित ने उसके छोटे भाई और अपने छोटे साले साहब को ले जाने के लिए हामी भरी। चलती हुई बाइक में अंकित ने कहा –
“ऐसा नहीं लग रहा, जैसे हम दोनों पति-पत्नी हों और ये हमारा बच्चा हो?”
इस पर दोनों खूब जोर से हंस पड़े। पहाड़ों के इस मौसम में अंकित, अनु के और नज़दीक आना चाहता था इसलिए उसने जंगल के अंदर किसी अच्छी सी जगह पर जाकर बैठने का फ़ैसला किया।
रास्ते में छोटी पगडंडी देखते हुए अंकित ने बाइक मोड़ी और चल पड़े दोनों जंगल की ओर। अनु ने अपने छोटे भाई को मोबाइल देकर वहीं बाइक के पास ही छोड़ दिया।
अंकित ने अनु की ओर देखा
वो थोड़ी सी शर्मा रही थी। अंकित ने धीरे से उसका हाथ थामा। दोनों जंगल के अंदर जाने लगे। मन में उत्साह के साथ-साथ पकड़े जाने का डर भी जोरों से चल रहा था। पर क्या करें, एक बहुत ही रोमांटिक सा पल भी तो बन रहा था।
जंगल के अंदर पहुॅचते ही सबसे पहले अंकित ने अनु को जोर से गले लगाया वहीं अनु भी मानो अपना सबकुछ भूलकर बस अंकित में ही खो गई थी । कुछ पल एक दूसरे की बाहों में रहने के बाद अंकित ने उसे माथे पर अपने होठों से स्पर्श करते हुए हमेशा उसके साथ इतने ही प्यार से रहने कर वादा किया । जंगल की हर झाड़ी, हर पौधा उनकी मोहब्बत और उस वादे का गवाह बना ।
वो यादगार पल पूरे दिन साथ बिताने के बाद, अंत में अंकित ने उसे फिर से डैम के ऊपर छोड़ दिया और जल्द दोबारा मिलने का वादा कर अपने घर की ओर चला गया ।
अब सवाल ये है कि क्या इनकी प्रेम कहानी यूँ ही हमेशा चलती रहेगी, या फिर किसी मोड़ पर इनकी ज़िंदगी करवट लेगी? रहस्य जानने के लिए पढ़िए इस कहानी का अगला भाग, बहुत जल्द…
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