किसी व्यक्ति की असली कमाई उसके रिश्ते होते हैं।
आज टेक्नोलॉजी हमें जोड़ने के लिए बनी है,
लेकिन असलियत मे हम अपनों से और दूर हो गए हैं।
यह कहानी है आर्यन और उसके पापा की जहाँ प्यार था लेकिन समय नहीं।
जहाँ विडियो कॉल थी लेकिन मुलाकात नहीं।
इस कहानी को पढ़ते समय हो सकता है आप भी अपने पापा, मां या किसी अपने को याद करने लगे।
शहर की चमक और रिश्तों की चमक
आर्यन बड़े शहर में नौकरी करता था।
सुबह से रात तक बस वो काम में व्यस्त रहता था।
घर तो उसका सिर्फ नाम का था उसका सारा समय ऑफिस में गुजरता।
माँ – पापा गाँव में थे।
पापा हमेशा कहते –
‘‘बेटा बस कभी वक्त मिल जाए आ जाना बहुत समय हो गया।‘‘
मुस्कुराकर जवाब देता –
‘‘पापा जरूर आऊँगा…..Promise!‘‘
लेकिन हकीकत तो ये था? उसे वक्त कभी मिला ही नहीं।
पापा का रोज का आदत था, शाम होते ही आर्यन को कॉल करने का।
उसे कॉल करने के लिए वो रोज छत में जाते थे पड़ोसी पूछते!
किसे ढूंढ़ रहे हैं तिवारी जी?
आर्यन, पापा बस मुस्कुरा देते और ये सब देख माँ की आंखे भीग जातीं।
पापा की आखिरी विडियो कॉल
एक रात ऑफिस में आर्यन की देर तक मिटिंग चल रही थी।
कॉफी, लेपटॉप और फाइलों के बीच फोन की घंटी बजी।
उसने फोन देखा तो स्क्रीन पर लिखा था – Papa Calling!
आर्यन ने जल्दी से विडियो कॉल उठाया और कहा!
पापा मैं मिटिंग में हूं बाद में बात करता हूं!
पापा ने कॉल रखा और धीरे से कहा-
बस यही सुनकर जी लेता हँ।
कॉल कट गया और वही कॉल आर्यन की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती बन गई।
उसी रात पापा के सीने में तेज दर्द हुआ। हास्पिटल ले जाते – ले जाते पापा हमेशा के लिए मौन हो गए।
अब आर्यन को कॉल आता है। उसे उसके पापा के बारे में पता चलता है।
वो फौरन घर पहूचता है।
माँ रो रही थी। चारों तरफ बस पापा की यादें थी।
माँ ने एक डायरी उसके हाथ में दी। ‘‘यह तुम्हारे पापा की है।‘‘
आरव ने उसे खोला। हर पन्ने में बस उसका ही जिक्र…..
लास्ट बार उन्होनें लिया था –
- आज आरव व्यस्त था उसकी आवाज सुनकर दिल को शांति मिलती है।
- काश आज वो आकर एक बार गले लग जाए।
- भगवान मेरे बेटे को हमेशा सलामत रखना।
ये सब देखकर आर्यन फूट – फूट कर रोने लगा।
जहाँ वो अपने पापा के अच्छे जीवन के लिए पैसे जोड़ता रहा।
वहीं उसके पापा उसके आने की पल गिनते रहे।
आखिरी संदेश का दर्द
आर्यन ने पापा का फोन खोला। आखिरी रिकॉर्डेड विडियो कॉल में वो कह रहे थे-
‘‘जब तू आएगा न बेटा तब मैं घर की छत पर लाईट लगा दूंगा…
ताकि तू मुझे दूर से ही देख ले और घर पहचान ले।‘‘
आर्यन ये सुनकर टूट गया।
क्योकि अब घर पहचान कराने वाला उसके पापा ही नहीं रहे।
उसे समझ आया जो आज है वही कल याद बन जाता हैै।
इससे ये कहानी का निष्कर्ष निकलता है-
- हम कभी न कभी ये गलती करते हैं कि काम को रिश्तों से उपर रख देते है।
- जबकि हमें रिश्तों को आगे रखना चाहिए क्योंकि समय कभी लौटकर नहीं आता।
- रिश्तें में अगर प्यार है तो उसे समय पर कहना जरूरी हैं।
- रिश्तों के लिए असली तोहफा समय ही होता है।
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Final Massege To Readers
- इसे कहानी समझ कर मत छोड़िए, आज ही उनसे बात कीजिए,
- आज ही उनके पास बैठिए, उन्हें समय दीजिए।
- जो आपको अहमियत देते हैं दिल के करीब रखते हैं।
- रिश्तों को समय दीजिए समय ही असली पूँजी है।
क्योंकि
एक विडियो कॉल किसी का आखिरी इंतजार हो सकता हैं।
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