ये है दीया – त्याग, प्रेम और संघर्ष की सच्ची मिसाल जिसने बचपन से ही दुख देखा था। उसका संपन्न परिवार उदयपुर के मावली गांव में रहता था। परिवार में उसके मां-पापा, एक बड़ी बहन दिव्या, दीया दूसरे नंबर की थी। उससे छोटा एक भाई दिवाकर, फिर सबसे छोटी एक बहन थी दिप्ती । दीया के पापा एक सरकारी स्कूल में हेड मास्टर थे।
घर की बड़ी बेटी दिव्या का शादी पास के ही एक गांव में तय हो चुका था। घर में शादी को लेकर एक उत्साह का महौल था। पर होनी को कौन टाल सकता है। शादी को 20 से 25 दिन ही बचे थे। दिया के पापा का हार्ट अटैक से देहांत हो जाता है । परिवार पर जैसे दुख का पहाड़ टुट पड़ता है । पुरा परिवार अब परेशान हो जाता है कि आगे क्या होगा? शादी कैैसी होगी?
बड़ी मुश्किल से तो ये एक रिश्ता आया था। अब देखा जाय तो पुरे घर में एक दीया ही थी जो इस परिवार को संभाल सकती थी। दीया पढ़ी-लिखी एक समझदार लड़की थी। वो पास के शहर में ही इंजीनियरिंग कर रही थी। अपने पिता की खबर सुनकर वो तुरंत ही मावली आ गई।।
दीया के सपने और प्यार
मां और पुरे परिवार की ऐसी हालत देखकर दीया ने एक फैसला लिया कि पापा से मिली अनुकंपा नियुक्ति नौकरी अब वह करेगी। दीया के लिए यह फैसला इतना आसान नहीं था क्योकि उसे इंजीनियर बनना था। हालांकि उसके सपने बहुत बड़े थे किन्तु उससे भी बड़ा उसके लिए परिवार था। परन्तु दीया का यह फैसला सबको चौका देने वाला था क्योंकि ये बात सब जानते थे कि दीया ने ये कॉलेज पाने के लिए कितना मेहनत किया था।
उससे मिलने उसके कॉलेज के कुछ दोस्त आते हैं वो भी कॉलेज में दीया के साथ ही पढ़ते थे। इन्ही दोस्तों में उसका एक खास दोस्त था सुमित। सुमित और दीया हालांकि उन दोनों की दोस्ती नहीं प्यार था। उन दोनों में कॉफी चीजे मिलती जुलती थी। उनकी मुलाकात कॉलेज में ही हुई थी। इंजीनियरिंग खत्म करके जॉब लगते ही दोनों शादी करने वाले थे। सुुमित भी एक अच्छे व संपन्न परिवार से था। इसलिए वे जानते थे कि उन दोनों का परिवार उनके रिश्ते के लिए आसानी सेे मान जाएगा। बस दोनों को अपने नौकरी का ही इंतजार था।
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दिव्या के शादी के लिए दीया का संघर्ष
अब समय बितने लगा शादी को लगभग थोड़े दिन ही बाकी थे वो समय था जिसमें परिवार के लोगों के चेहरे पर थोड़ी स्माईल देखने को मिली। दीया का मन ये देखकर थोड़ा हल्का हुआ ही था कि उसको दिव्या के ससुराल वालों का कॉल आता है और वे एक गाड़ी की मांग करते है। दीया यह सुनकर बहुत परेशान हो जाती है बहुत ही मुश्किल से तो एक रिश्ता आया था और बात शादी तक पहुंची थी।
दीदी अपने शादी से बहुत ही खुश थी इसलिए दीया इस बात को सोच-सोच कर परेशान रहने लगी। वह ये बात अपनी मां से छुपाना चाहती थी पर मां ने बात का पता लगा ही लिया। अब मां और दीया सोचने लगे की क्या किया जाए ? सुमित का दोस्त रामु लोन देता था, दुसरे दिन ही जाकर रामु से मिलती है और बैंक जाकर लोन ले लेती है। इस तरह दिव्या के शादी का दिन भी आ जाता है और शादी संपन्न होती है।
परिवार की बदनामी
दिवाकर की बदमाशी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी। दिवाकर ने तो इस बार हद ही कर दी वो एक लड़की को शादी कर के घर ले आता हैै । समाज दिवाकर और उसकी पत्नी को समाज में स्वीकार करने के लिए 50000रू हर्जाना की मांग करती है। शाम का समय था , उसकी मां छत पर बैठी थी परन्तु जब वो उनके पास जाती है तो उसे मां रोती हुई दिखती है। दीया को देखकर मां फूट-फूट कर रोने लगती है और कहती है कि हमारे उपर ये कैसे दुख के पहाड़ टुट पड़े है। ये बोलकर मां रोते हुए छत से अपने रूम पे आ जाती है।
सुबह का समय था। सरपंच गांव वालो के साथ दीया के घर आते है।
और कहते हैं- हर्जाने का क्या हुआ ?
आप हर्जाने भरकर दिवाकर को घर में वापस लाना चाहते हो या उसे समाज से बेदखल कर दिया जाए।
दीया घबरा जाती है और तुरंत सुमित को कॉल करके सारी बात बताती है।
तभी सुमित कहता है! तुम घबराओ नहीं मैं रामु से बात करता हूं।
अब अगले दिन रामु के पास जाती है उसे लोन मिल जाता है।
इस बात से खुश होकर वो सुमित से बात करते हुए घर आती है।
तभी उसे कुछ गांव के बदमाश लड़के घेर लेते है।वो दिवाकर के दोस्त ही थे।
अचानक से सुमित का कॉल काट देती है।
ये सब देखकर दिया मन ही मन सोचती हैं ? आखिर मेरे ही जीवन में शायद सारी परेशानी लिखी है।
मैं करना कुछ और चाहती हुं और हो कुछ और ही जाता है |
जो सोचा नहीं होता है वही हमेशा हो जाता है और कहती है –
मैं परिचित थी होने वाली सारी घटनाओं से,
लेकिन सभी का एक साथ घटना मेरी सोच से परे था।
अंत या नई शुरूआत ?
अब आगे पता चलेगा कि क्या सुमित और दीया का रिश्ता आगे बढ़ पाएगा ?
या फिर दीया का संघर्ष जो कभी खत्म नहीं हो पा रहा था उसे देखकर पीछे हट जाएगा ? दीया – त्याग, प्रेम और संघर्ष की सच्ची मिसाल
क्या दीया अपनी भाभी स्वाति से अपने भाई के बारे में बता पाएगी ?
या फिर वो स्वाति और दिवाकर के रिश्ते टूटने के डर से चुप हो जाएगी ?
क्या ऐसे ही जिंदगी भर दीया को संघर्ष करना पड़ेगा ?
या फिर सुमित उसे समझेगा और उसका साथ देगा ?
जानने के लिए कहानी का अगला भाग जरूर पढ़े।
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